ग़ज़ल
आपसे दिल लगा के देख लिया
राजे-उल्फत छुपा के देख लियादिल बहुत कुछ जला के देख लियाराजे-उल्फत छुपा के देख लियाऔर क्या देखने को बाकी हैआपसे दिल जगा के देख लियाराजे-उल्फत छुपा के देख लियावो मेरे होके भी मेरे न हुएउनको अपना बना के देख लियाराजे-उल्फत छुपा के देख लियातकमील हम भी हो न सकेइश्क को आजमा के देख लियाराजे-उल्फत छुपा के देख लियादिल बहुत जला के देख लियाकोई कभी तकमील नहीं हुआ'फैज़' तकमील हम भी हो न सके.
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