ग़ज़ल

आज बाज़ार में पा-ब-जौला चलो

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ · सब कलाम देखें
आज बाज़ार में पा-ब-जौला चलो
चश्म-ए-नम जान-ए-शोरीदा काफी नहींतोहमत-ए-इश्क़ पोशीदा काफी नहींआज बाज़ार में पा-ब-जौला चलो
दस्त-अफ्शां चलो, मस्त-ओ-रक़्सां चलोखाक-बर-सर चलो, खूं-ब-दामां चलोराह तकता है सब शहर-ए-जानां चलो
हाकिम-ए-शहर भी, मजम-ए-आम भीतीर-ए-इल्ज़ाम भी, संग-ए-दुश्नाम भीसुबह-ए-नाशाद भी, रोज़-ए-नाकाम भी
इनका दमसाज़ अपने सिवा कौन हैशहर-ए-जानां मे अब बा-सफा कौन हैदस्त-ए-क़ातिल के शायां रहा कौन है
रख्त-ए-दिल बांध लो दिलफिगारों चलोफिर हमीं क़त्ल हो आयें यारों चलो
आज बाज़ार में पा-ब-जौला चलो
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