ग़ज़ल
जग सूँ कहा हमारा
जगसूँ कहा हमारा।जब देख्या नूर तुम्हारा॥टेक॥
परम तेज घर मेरा।सुख-सागर माहिं बसेरा॥१॥
झिलिमिलि अति आनंदा।पाया परमानंदा॥२॥
जोति अपार अनंता।खेलै फाग बसंता॥३॥
आदि अंत असथाना।दादू सो पहिचाना॥४॥
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