ग़ज़ल

नूर रह्या भरपूर

दादू दयाल · सब कलाम देखें
नूर रह्या भरपूर, अमीरस पीजिये।रस मोहैं रस होइ, लाहा लीजिये॥टेक॥
परगट तेज अनंत पार नहिं पाइये।झिलिमिल-झिलिमिल होइ, तहाँ मन लाइये॥१॥
सहजैं सदा प्रकास, ज्योति जल पूरिया।तहाँ रहै निज दास, सेवग सूरिया॥२॥
सुख-सागर वार न पार, हमारा बास है।हंस रहैं ता माहिं, दादू दास है॥३॥
स्रोत-सत्यापन प्रतीक्षित — This text is pending verification against an authoritative source and may contain errors.