ग़ज़ल
जागि रे सब रैण बिहाणी
जागि रे सब रैण बिहाणी।जाइ जनम अँजुलीको पाणी॥टेक॥
घड़ी घड़ी घड़ियाल बजावै।जे दिन जाइ सो बहुरि न आवै॥१॥
सूरज-चंद कहैं समुझाइ।दिन-दिन आब घटती जाइ॥२॥
सरवर-पाणी तरवर-छाया।निसदिन काल गरासै काया॥३॥
हंस बटाऊ प्राण पयाना।दादू आतम राम न जाना॥४॥
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