ग़ज़ल

पर्दे-पर्दे में आताब अच्छे नहीं

दाग़ देहलवी · सब कलाम देखें
पर्दे पर्दे में अताब अच्छे नहींऐसे अन्दाज़-ए-हिजाब अच्छे नहीं
मयकदे में हो गए चुपचाप क्योंआज कुछ मस्त-ए-शराब अच्छे नहीं
ऐ फ़लक! क्या है ज़माने की बिसातदम-ब-दम के इन्क़लाब अच्छे नहीं
तू भी उसकी ज़ुल्फे-पेचाँ हो गयाऐ दिल, ऐसे पेचो-ताब अच्छे नहीं
बज्म-ए-वाइज़ से कोई कहता गयाऐसे जलसे बे-शराब अच्छे नहीं
तौबा कर लें हम मय-ओ-माशूक़ सेबे-मज़ा हैं ये सवाब अच्छे नहीं
इक नजूमी 'दाग़' से कहता था आजआप के दिन ऐ जनाब अच्छे नहीं
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