ग़ज़ल
न जाओ हाल-ए-दिल-ए-ज़ार देखते जाओ
न जाओ हाल-ए-दिल-ए-ज़ार देखते जाओकि जी न चाहे तो नाचार देखते जाओ
बहार-ए-उमर् में बाग़-ए-जहाँ की सैर करोखिला हुआ है ये गुलज़ार देखते जाओ
उठाओ आँख, न शरमाओ ,ये तो महिफ़ल हैग़ज़ब से जानिब-ए-अग़यार देखते जाओ
हुआ है क्या अभी हंगामा अभी कुछ होगाफ़ुगां में हश्र के आसार देखते जाओ
तुम्हारी आँख मेरे दिल से बेसबब-बेवजहहुई है लड़ने को तय्यार देखते जाओ
न जाओ बंद किए आँख रहरवान-ए-अदमइधर-उधर भी ख़बरदार देखते जाओ
कोई न कोई हर इक शेर में है बात ज़रूरजनाबे-दाग़ के अशआर देखते जाओ
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