ग़ज़ल

उनके एक जां-निसार हम भी हैं

दाग़ देहलवी · सब कलाम देखें
उनके एक जां-निसार हम भी हैंहैं जहाँ सौ-हज़ार हम भी हैं
तुम भी बेचैन हम भी हैं बेचैनतुम भी हो बेक़रार हम भी हैं
ऐ फ़लक कह तो क्या इरादा हैऐश के ख्वास्तगार हम भी है
शहर खाली किए दुकां कैसीएक ही वादा-ख्वार हम भी हैं
शर्म समझे तेरे तग़ाफ़ुल कोवाह! क्या होशियार हम भी हैं
तुम अगर अपनी ख़ू के हो माशूक़अपने मतलब के यार हम भी हैं
जिस ने चाहा फंसा लिया हमकोदिल-बरों के शिकार हम भी हैं
कौन सा दिल है जिस में 'दाग़' नहींइश्क़ की यादगार हम भी हैं
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