ग़ज़ल
मुहब्बत में करे क्या कुछ किसी से हो नहीं सकता
मुहब्बत में करे क्या कुछ किसी से हो नहीं सकतामेरा मरना भी तो मेरी ख़ुशी से हो नही सकता
न रोना है तरीक़े का न हंसना है सलीके़ कापरेशानी में कोई काम जी से हो नहीं सकता
ख़ुदा जब दोस्त है ऐ 'दाग़' क्या दुश्मन से अन्देशाहमारा कुछ किसी की दुश्मनी से हो नहीं सकता
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