ग़ज़ल

पुकारती है ख़ामोशी मेरी फ़ुगां की तरह

दाग़ देहलवी · सब कलाम देखें
पुकारती है ख़ामोशी मेरी फ़ुगां की तरहनिगाहें कहती हैं सब राज़-ए-दिल ज़ुबां की तरह
जला के दाग़-ए-मुहब्बत ने दिल को ख़ाक कियाबहार आई मेरे बाग में ख़िज़ां की तरह
तलाश-ए-यार में छोड़ी न सर-ज़मीं कोईहमारे पांव में चक्कर हैं आसमां की तरह
अदा-ए-मत्लब-ए-दिल हमसे सीख जाए कोईउन्हें सुना ही दिया हाल दास्तां की तरह
पाठ सत्यापित · Text verified against Kavita Kosh