ग़ज़ल

अच्छी सूरत पे

दाग़ देहलवी · सब कलाम देखें
अच्छी सूरत पे ग़ज़ब टूट के आना दिल कायाद आता है हमें हाय! ज़माना दिल का
तुम भी मुँह चूम लो बेसाख़ता प्यार आ जाएमैं सुनाऊँ जो कभी दिल से फ़साना दिल का
पूरी मेंहदी भी लगानी नहीं आती अब तकक्योंकर आया तुझे ग़ैरों से लगाना दिल का
इन हसीनों का लड़कपन ही रहे या अल्लाहहोश आता है तो आता है सताना दिल का
मेरी आग़ोश से क्या ही वो तड़प कर निकलेउनका जाना था इलाही के ये जाना दिल का
दे ख़ुदा और जगह सीना-ओ-पहलू के सिवाके बुरे वक़्त में होजाए ठिकाना दिल का
उंगलियाँ तार-ए-गरीबाँ में उलझ जाती हैंसख़्त दुश्वार है हाथों से दबाना दिल का
बेदिली का जो कहा हाल तो फ़रमाते हैंकर लिया तूने कहीं और ठिकाना दिल का
छोड़ कर उसको तेरी बज़्म से क्योंकर जाऊँएक जनाज़े का उठाना है उठाना दिल का
निगहा-ए-यार ने की ख़ाना ख़राबी ऎसीन ठिकाना है जिगर का न ठिकाना दिल का
बाद मुद्दत के ये ऎ दाग़ समझ में आयावही दाना है कहा जिसने न माना दिल का
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