ग़ज़ल

आरजू है वफ़ा करे कोई

दाग़ देहलवी · सब कलाम देखें
आरजू है वफ़ा करे कोईजी न चाहे तो क्या करे कोई
गर मर्ज़ हो दवा करे कोईमरने वाले का क्या करे कोई
कोसते हैं जले हुए क्या क्याअपने हक़ में दुआ करे कोई
उन से सब अपनी अपनी कहते हैंमेरा मतलब अदा करे कोई
तुम सरापा हो सूरत-ए-तस्वीरतुम से फिर बात क्या करे कोई
जिस में लाखों बरस की हूरें होंऐसी जन्नत को क्या करे कोई
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