ग़ज़ल
फिर शब-ए-ग़म ने मुझे शक्ल दिखाई क्योंकर
फिर शब-ए-ग़म ने मुझे शक्ल दिखाई क्योंकरये बला घर से निकाली हुई आई क्योंकर
तू ने की ग़ैर से मेरी बुराई क्योंकरगर् न थी दिल में तो लब पर तेरे आई क्योंकर
तुम दिलाज़ार-ओ-सितमगर नहीं मैं ने मानामान जायेगी इसे सारी ख़ुदाई क्योंकर
आईना देख के वो कहने लगे आप ही आपऐसे अच्छों की करे कोई बुराई क्योंकर
कसरत-ए-रंज-ओ-अलम सुन के ये इल्ज़ाम मिलाइतने से दिल में है इतनों की समाई क्योंकर
दाग़ कल तक तो दुआ आप की मक़बूल न थीआज मूँह माँगी मुराद आप ने पाई क्योंकर
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