ग़ज़ल

न रवा कहिये न सज़ा कहिये

दाग़ देहलवी · सब कलाम देखें
न रवा कहिये न सज़ा कहियेकहिये कहिये मुझे बुरा कहिये
दिल में रखने की बात है ग़म-ए-इश्क़इस को हर्गिज़ न बर्मला कहिये
वो मुझे क़त्ल कर के कहते हैंमानता ही न था ये क्या कहिये
आ गई आप को मसिहाईमरने वालो को मर्हबा कहिये
होश उड़ने लगे रक़ीबों के"दाग" को और बेवफ़ा कहिये
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