ग़ज़ल
इस अदा से वो वफ़ा करते हैं
इस अदा से वो वफ़ा करते हैंकोई जाने कि वफ़ा करते हैं
हमको छोड़ोगे तो पछताओगेहँसने वालों से हँसा करते हैं
ये बताता नहीं कोई मुझकोदिल जो आ जाए तो क्या करते हैं
हुस्न का हक़ नहीं रहता बाक़ीहर अदा में वो अदा करते हैं
किस क़दर हैं तेरी आँखे बेबाकइन से फ़ित्ने भी हया करते हैं
इस लिए दिल को लगा रक्खा हैइस में दिल को लगा रक्खा है
'दाग़' तू देख तो क्या होता हैजब्र पर जब्र किया करते हैं
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