ग़ज़ल
पयामे-वफ़ा
हो चुकी क़ौम के मातममें बहुत सीनाज़नीअब हो इस रंग का सन्यासये है दिल में ठनीमादरे-हिन्दकी तस्वीर हो सीने पे बनीबेड़ियाँ पैर में हों और गले में क़फ़नी
हो ये सूरत से अयाँ आशिक़े-आज़ादी हैकुफ़्लहै जिनकी ज़बाँ पर यह वह फ़रियादी है
आज से शौक़े वफ़ाका यही जौहरहोगाफ़र्श काँटों का हमें फूलों का बिस्तर होगाफूल हो जाएगा छाती पे जो पत्थर होगाक़ैद ख़ाना जिसे कहते हैं वही घर होगा
सन्तरी देख के इस जोश को शरमाएँगेगीत ज़ंजीर की झनकार पे हम गाएँगे
स्रोत-सत्यापन प्रतीक्षित — This text is pending verification against an authoritative source and may contain errors.