ग़ज़ल

प्रेतिनी पिसाच अरु निसाचर निशाचरहू

भूषण · सब कलाम देखें
प्रेतिनी पिसाच अरु निसाचर निशाचरहू,मिलि मिलि आपुस में गावत बधाई हैं.
भैरो भूत-प्रेत भूरि भूधर भयंकर से,जुत्थ जुत्थ जोगिनी जमात जुरि आई हैं.
किलकि किलकि के कुतूहल करति कलि,डिम-डिम डमरू दिगम्बर बजाई हैं.
सिवा पूछें सिव सों समाज आजु कहाँ चली,काहु पै सिवा नरेस भृकुटी चढ़ाई हैं.
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