ग़ज़ल उठा के नाज़ से दामन भला किधर को चले भारतेंदु हरिश्चंद्र · सब कलाम देखें हिन्दी रोमन उठा के नाज़ से दामन भला किधर को चले।इधर तो देखिए बहरे ख़ुदा किधर को चले॥ पाठ सत्यापित · Text verified against Kavita Kosh