ग़ज़ल
इन दुखियन को न चैन सपनेहुं मिल्यौ
इन दुखियन को न चैन सपनेहुं मिल्यौ,तासों सदा व्याकुल बिकट अकुलायँगी।प्यारे 'हरिचंद जूं' की बीती जानि औध, प्रानचाहते चले पै ये तो संग ना समायँगी।देख्यो एक बारहू न नैन भरि तोहिं यातैं,तौन जौन लोक जैहैं तहाँ पछतायँगी।बिना प्रान प्यारे भए दरस तुम्हारे, हाय!मरेहू पै आंखे ये खुली ही रहि जायँगी।
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