ग़ज़ल
प्राप्तव्य
इस धरती पर लाना है,हमें खींच कर स्वर्गकहीं यदि उसका ठौर-ठिकाना है!
यदि वह स्वर्ग कल्पना ही होयदि वह शुद्ध जल्पना ही होतब भी हमें भूमि माता कोअनुपम स्वर्ग बनाना है!जो देवोपम है उसको ही इस धरती पर लाना है!
और स्वर्ग तो भोग-लोक हैतदुपरान्त बस रोग-शोक हैहमें भूमि को योग-लोक कानव अपवर्ग बनाना है!
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