नज़्म

शिकवा

अल्लामा इक़बाल · सब कलाम देखें
क्यूँ ज़ियाँ-कार बनूँ सूद-फ़रामोश रहूँफ़िक्र-ए-फ़र्दा न करूँ महव-ए-ग़म-ए-दोश रहूँ
नाले बुलबुल के सुनूँ और हम-तन-गोश रहूँहम-नवा मैं भी कोई गुल हूँ कि ख़ामोश रहूँ
जुरअत-आमोज़ मिरी तर्ज़-ए-सुख़न है मुझ कोशिकवा अल्लाह से ख़ाकम-ब-दहन है मुझ को