ग़ज़ल
चमने-ख़ार-ख़ार है दुनिया
चमने-ख़ार-ख़ार है दुनियाख़ूने-सद नौबहार है दुनिया
जान लेती है जुस्तजू इसकीदौलते-ज़ेरे-मार है दुनिया
ज़िन्दगी नाम रख दिया किसनेमौत का इंतज़ार है दुनिया
ख़ून रोता है शौक़ मंज़िल कारहज़ने-रहगुज़ार है दुनिया
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