ग़ज़ल
चमक तेरी अयाँ बिजली में आतिश में शरारे में
चमक तेरी अयाँ बिजली में आतिशमें शरारेमेंझलक तेरी हवेदाचाँद में सूरज में तारे में
बुलन्दी आसमानों में ज़मीनों में तेरी पस्तीरवानी बह्र में उफ़्तादगीतेरी किनारों में
जो है बेदारइन्साँ में वो गहरी नींद सोता हैशजर में फूल में हैवान में पत्थर में तारे में
मुझे फूँका है सोज़े-क़तरा-ए-अश्क-ए-महब्बत नेग़ज़ब की आग थी पानी के छोटे-से शरारेमें
नहीं जिन्से-सवाबे-आख़रतकी आरज़ू मुझकोवो सौदागर हूँ मैंने नफ़्आदेखा है ख़सारेमें
सकूँ ना-आश्नारहना इसे सामाने-हस्ती हैतड़प इस दिल की यारब छिप के आ बैठी है पारे में
सदा-ए-लनतरानीसुन के ऐ इक़बाल मैं चुप हूँतक़ाज़ों की कहाँ ताक़त है मुझ फ़ुरक़त के मारे में
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