ग़ज़ल
अक़्ल ने एक दिन ये दिल से कहा
अक़्ल ने एक दिन ये दिल से कहाभूले-भटके की रहनुमा हूँ मैं
दिल ने सुनकर कहा-ये सब सच हैपर मुझे भी तो देख क्या हूँ मैं
राज़े-हस्ती को तू समझती हैऔर आँखों से देखता हूँ मैं
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