ग़ज़ल

ख़ुदा का फ़रमान

अल्लामा इक़बाल · सब कलाम देखें
उट्ठो मेरी दुनिया के ग़रीबों को जगा दोख़ाक-ए-उमरा के दर-ओ-दीवार हिला दो
गर्माओ ग़ुलामों का लहू सोज़-ए-यक़ीं सेकुन्जिश्क-ए-फिरोमाया को शाहीं से लड़ा दो
सुल्तानी-ए-जमहूर का आता है ज़मानाजो नक़्श-ए-कुहन तुम को नज़र आये मिटा दो
जिस खेत से दहक़ाँ को मयस्सर नहीं रोज़ीउस ख़ेत के हर ख़ोशा-ए-गुन्दम को जला दो
क्यों ख़ालिक़-ओ-मख़लूक़ में हायल रहें पर्देपीरान-ए-कलीसा को कलीसा से हटा दो
मैं नाख़ुश-ओ-बेज़ार हूँ मरमर के सिलों सेमेरे लिये मिट्टी का हरम और बना दो
तहज़ीब-ए-नवीं कारगह-ए-शीशागराँ हैआदाब-ए-जुनूँ शायर-ए-मशरिक़ को सिखा दो
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