ग़ज़ल
असर करे न करे सुन तो ले मेरी फ़रियाद
असर करे न करे सुन तो ले मेरी फ़रियादनहीं है दाद का तालिब ये बंद-ए-आज़ाद
ये मुश्त-ए-ख़ाक ये सरसर ये वुसअत-ए-अफ़लाककरम है या के सितम तेरी लज़्ज़त-ए-ईजाद
ठहर सका न हवा-ए-चमन में ख़ेम-ए-गुलयही है फ़स्ल-ए-बहारी यही है बाद-ए-मुराद
क़ुसूर-वार ग़रीब-उद-दयार हूँ लेकिनतेरा ख़राबा फ़रिश्ते न कर सके आबाद
मेरी जफ़ा-तलबी को दुआएँ देता हैवो दश्त-ए-सादा वो तेरा जहान-ए-बे-बुनियाद
ख़तर-पसंद तबीअत को साज़-गार नहींवो गुलसिताँ के जहाँ घात में न हो सय्याद
मक़ाम-ए-शौक़ तेरे क़ुदसियों के बस का नहींउन्हीं का काम है ये जिन के हौसले हैं ज़ियाद
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