ग़ज़ल

तस्कीन न हो जिस से

अल्लामा इक़बाल · सब कलाम देखें
तस्कीन न हो जिस से वो राज़ बदल डालोजो राज़ न रख पाए हमराज़ बदल डालो
तुम ने भी सुनी होगी बड़ी आम कहावत हैअंजाम का जो हो खतरा आगाज़ बदल डालो
पुर-सोज़ दिलों को जो मुस्कान न दे पाएसुर ही न मिले जिस में वो साज़ बदल डालो
दुश्मन के इरादों को है ज़ाहिर अगर करनातुम खेल वो ही खेलो, अंदाज़ बदल डालो
ऐ दोस्त! करो हिम्मत कुछ दूर सवेरा हैगर चाहते हो मंजिल तो परवाज़ बदल डालो
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