ग़ज़ल रंजिश ही सही अहमद फ़राज़ · सब कलाम देखें हिन्दी रोमन रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आआ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आपहले से मरासिम न सही फिर भी कभी तोरस्म-ओ-रह-ए-दुनिया ही निभाने के लिए आ पाठ सत्यापित · Text verified against Kavita Kosh