ग़ज़ल
इस दौर-ए-बेजुनूँ की कहानी कोई लिखो
इस दौर-ए-बेजुनूँ की कहानी कोई लिखोजिस्मों को बर्फ़ ख़ून को पानी कोई लिखो
कोई कहो कि हाथ क़लम किस तरह हुएक्यूँ रुक गई क़लम की रवानी कोई लिखो
क्यों अहल-ए-शौक़ सर-व-गरेबाँ हैं दोस्तोक्यों ख़ूँ-ब-दिल है अहद-ए-जवानी कोई लिखो
क्यों सुर्मा-दर-गुलू है हर एक तायर-ए-सुख़नक्यों गुलसिताँ क़फ़स का है सानी कोई लिखो
हाँ ताज़ा सानेहों का करे कौन इंतज़ारहाँ दिल की वारदात पुरानी कोई लिखो
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