ग़ज़ल
इस से पहले कि बेवफ़ा हो जाएँ
इस से पहले कि बेवफ़ा हो जाएँक्यूँ न ए दोस्त हम जुदा हो जाएँ
तू भी हीरे से बन गया पत्थरहम भी कल जाने क्या से क्या हो जाएँ
हम भी मजबूरियों का उज़्र करेंफिर कहीं और मुब्तिला हो जाएँ
अब के गर तू मिले तो हम तुझसेऐसे लिपटें तेरी क़बा हो जाएँ
बंदगी हमने छोड़ दी फ़राज़क्या करें लोग जब ख़ुदा हो जाएँ
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